.क्या एक कच्चा धागा रिश्ता जोड़ने और दो कानूनी कागजात रिश्ता तोड़ने के लिए काफी है????रिश्ता!!!ये शब्द बनाते समय उपरवाले ने क्या सोचा होगा????कुछ तो सोचा ही होगा ना????पर क्या???मुझे नही मालूम......आपको पता है??अगर हा....तो मुझे जरुर बताना में जानना चाहती हु......."रिश्ते बनाने वाले क्या तेरे मन में समाया ???तुने कहे को रिश्ता बनाया?हर रिश्ते की अपनी एहमियत है.....फिर चाहे वो रिश्ता कोई भिहो...बिना प्यार और विश्वास के नही टिक सकता....|रिश्तों में कभी कभी गलतफहमिया पैदा हो जाती है और ये गलत्फेह्मिया कड़वाहट का कर्ण बनती है|देक्घते ही देखते डोर हाथ से छूटने लगती है|असे में दोनों में कोई एक भी पहल करे तो एक खुबसूरत सास बहु का या भाई बहन का या पिता पुत्र का या कोई भी और रिश्ता टूटने से बच सकता है.....लेकिन एसा हो नही पता..ये कमबख्त EGO चीज ही असी होती है!!!


ना तोड़ना इस तरह किसी रिश्ते को......ना जोड़ना गर निभा ना सको किसी रिश्ते को!!!
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